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खबरची से बचिए डॉ साहेब !मरीज दूसरे डॉ के पास ——-
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2019 के चुनाव नजदीक आते ही सभी राजनीतिक दलों के कार्यालय में सरगर्मी तेज हो गई है खबरीलाल भी विगत एक वर्षों से किन्हीं कारण कहीं निकल नहीं पा रहा था कल अचानक खबरीलाल भी सोचा क्यों ना चुनाव के पहले फिर से एक बार चटपटी खबरों के साथ आपके समक्ष माफी मांगते हुए उपस्थित हो और उसी कड़ी में आज मैं आपके समक्ष उपस्थित हुआ हूं और कोशिश करूंगा की हर दो-चार दिन में राज रंग के साथ ब्यूरोक्रेट्स के भी चटपटी खबरें आप तक खबरीलाल पहुंचाएगा इसमें हम किसी राजनेता का नाम या अधिकारी का नाम नहीं लिखेंगे लेकिन संदेश जरूर होगा और राजनेता के साथ साथ वरीय पदाधिकारी भी मुद्दे पर ध्यान देंगे खबरीलाल का मकसद सिर्फ खबरदार करना होगा चलिए खबरीलाल आज आप को लेकर चलता है लोकसभा में अपने आप को सत्ता के प्रबल दावेदार मान रहे कांग्रेस के कार्यालय के तरफ—
कांग्रेस कार्यालय के समक्ष जैसे ही खबरीलाल पहुंचा एक कांग्रेसी ने देखा तो पूछ बैठे क्या बात है खबरीलाल जी लगता है चुनाव नजदीक है क्योंकि आप का निकलना तो होता नहीं है तो मैंने उन्हें अपनी परेशानी से अवगत कराया तो बोल बैठे आपके कई के मित्र आजकल कांग्रेस कार्यालय से दूर हो गए हैं और कई दूसरे दल के लिए भी हाथ-पांव मार रहे हैं जबकि दूसरे दल के एक कद्दावर नेता अभी से इस कार्यालय का नहीं सीधे दिल्ली कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं अब भला हम लोग क्या कर सकते हैं पार्टी आलाकमान का जो निर्णय होगा उस पर तो हम सबको खरा उतरना ही होगा दिन में, रात में तो हम लोग पूर्व की भांति विरोधी खेमा में चले ही जाएंगे
बात बात में ही नेता जी ने कहा भाई खबरीलाल जी हमारे यहां जो डॉक्टर साहब हैं उनकी निगाहें वैसे मरीज की तलाश कर रहे हैं जिसका वह इलाज करें तो वह स्वस्थ भी हो जाए और हमारे पेशा पर आंच भी नहीं आए डॉक्टर साहब है बड़े दिलदार सबका फ्यूज अपने पास रख कर सभी को कंफ्यूज करके रखे हैं ऐसे खबरीलाल जी मेरे बॉस के बारे में जरा सोचिए गा समय तो आ ही गया है हमारे डॉक्टर साहब एमआर की बात बड़े ध्यान से सुनते हैं परंतु दवाई वही लिखते हैं जो मरीज को सूट भी करे और मरीज को तकलीफ भी ना हो अब तो कांग्रेस की कार्य संस्कृति बदल रही है भाजपा की तरह हम लोग भी अब रात दिन मेहनत करते हैं आप तो देख ही रहे हैं
इनके साथ चाय पीने के साथ ही इन्हें टाटा करते सोचते हुए आगे बढ़ा की कुछ दिन पहले तक यह अपने पुराने साहब के खिलाफ खबर प्रकाशित कराने के लिए चक्कर काट रहे थे, लेकिन आज बॉस के पक्ष में समाचार लगवाने के लिए गुजारिश करते नजर आ रहे थे अब हमें तो लग रहा है यह कांग्रेस के खबरची है इससे मिलकर रहने में बहुत फायदा है महाशय ये ऐसे खबरची हैं, जिन्हें न केवल खुद के दल की बल्कि दूसरे दल की भी चिंता रहती है। ऐसे खबरची से साहब को ऊपर वाला बचाए। न जाने कब इनकी नजरें टेढ़ी हो जाए