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राज्यपाल-सह-कुलाधिपति द्वारा नवनिर्मित बहुउद्देश्यीय ‘प्रशाल’ का लोकार्पण
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कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के चतुर्थ दीक्षांत समारोह का आयोजन
राज्यपाल-सह-कुलाधिपति द्वारा नवनिर्मित बहुउद्देश्यीय ‘प्रशाल’ का लोकार्पण

हमारा प्रयास है राज्य के अधिक से अधिक युवा उच्च शिक्षा ग्रहण करें

अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण के आँकड़ों के मुताबिक झारखंड में उच्च शिक्षा में जनजातीय लड़कियों के नामांकन में सर्वाधिक बढोत्तरी होना सुखद है

चाईबासा शहर के टाटा कॉलेज प्रांगण में कोल्हान विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह नवनिर्मित ‘प्रशाल’ में आयोजित किया गया। इस आयोजन में मुख्य अतिथि के तौर पर राज्यपाल सह कुलाधिपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भाग लिया ।समारोह की अध्यक्षता कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति श्रीमती प्रो.डॉ. शुक्ला मोहंती ने की।
समारोह में सर्वप्रथम राज्यपाल महोदया के आगमन पर पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया गया, एवं समारोह की शुरुआत में सबसे पहले राष्ट्रगान उसके उपरांत विश्वविद्यालय कुलगीत एवं कुलाधिपति, विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रति कुलपति के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की विधिवत शुरुआत की गई।

अपने अभिभाषण के दौरान राज्यपाल ने कहा कि सर्वप्रथम कोल्हान विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की ऐतिहासिक अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देती हूं।

वर्ष 2009 में सृजित यह विश्वविद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण,अकादमिक गतिविधियों,खेलकूद एवं अन्य क्रियाकलापों से पहचान बनाने में सफल रहा है। किसी भी राष्ट्र का विकास उस देश की शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है।हमारा प्रयास है राज्य के अधिक से अधिक युवा उच्च शिक्षा ग्रहण करें चाहे वह किसी वर्ग के हो।लड़कियों,पिछले वर्गों, अल्पसंख्यकों,अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों को उच्च शिक्षा हासिल करने हेतु प्रेरित करने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। ज्ञानार्जन में जाति,लिंग,वर्ग कभी बाधक ना बने।शिक्षा से ही लोगों में जागृति आ सकती है तथा सामाजिक कुरीतियों का पूरी तरह से अंत हो सकता है।

अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण के आँकड़ों के मुताबिक झारखंड में उच्च शिक्षा में जनजातीय लड़कियों के नामांकन में सर्वाधिक बढोत्तरी होना एक सुखद पल है।

अपने अभिभाषण में कुलाधिपति ने कहा कि प्राकृतिक एवं खनिज सम्पदा से समृद्ध हमारे राज्य में विकास की असीम संभावनाएं हैं।ज्ञान और सूचना तकनीक के विभिन्न आयामों के जरिए हम विकास की गति में तीव्रता प्राप्त कर सकते हैं।ज्ञान और तकनीकी प्रतियोगितात्मक युग में विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होना चाहिए।हमारे शिक्षण संस्थानों की यह कोशिश होनी चाहिए कि विद्यार्थी एक सामाजिक,सुसंस्कृत और कुशल नागरिक के रूप में विकसित हो,वे नैतिकवान एवं चरित्रवान हो ऐसे नागरिक निश्चित रूप से देश और समाज के लिए अमूल्य संपदा सिद्ध होंगे।

कंप्यूटर ऑपरेटर, सुरक्षाकर्मियों,सफाई कर्मियों आदि सभी कर्मियों को ईपीएफ का लाभ प्रदान कर विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण कार्य किया है। योग एवं छऊ नृत्य जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करके एवं तकनीकी आधारित व्यावसायिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने का प्रयास करके विश्वविद्यालय बेहतर अकादमिक वातावरण बना रहा है।

प्रसन्नता का विषय है कि जनजातीय बहुल क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय ने आदिवासी ज्ञान एवं संस्कृति को संवर्धित एवं संरक्षित रखने के उद्देश्य से क्षेत्रीय एवं जनजाति भाषा विभाग द्वारा 9 पुस्तकों का प्रकाशन मूल लिपि में किया है।

कुलाधिपति के द्वारा उपाधि धारकों को शुभकामनाएं दी गयी एवं उनके सुखद भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम का समापन प्रति कुलपति प्रो. डॉ. श्री जीतेंद्र कुमार सिन्हा के धन्यवाद अभिभाषण से हुआ।

इस कार्यक्रम में पश्चिमी सिंहभूम जिला उपायुक्त श्री अरवा राजकमल, पुलिस अधीक्षक श्री चंदन कुमार झा,जिले के पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारीगण,विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारीगण, विश्वविद्यालय अंतर्गत कॉलेज के प्राचार्य,एवं छात्र छात्राएं मौजूद रहे।

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