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आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से गदरा आनंद मार्ग आश्रम में 3 घंटे का” बाबा नाम केवलम”
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आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से गदरा आनंद मार्ग आश्रम में 3 घंटे का” बाबा नाम केवलम” अखंड कीर्तन नारायण सेवा जरूरतमंदों के बीच वस्त्र वितरण किया गया आनंद मार्ग प्रचारक संघ के आचार्य  नवरुणानंद  अवधूत ने कीर्तन समाप्ति के बाद भक्तों को संबोधित करते हुए कहे कि  जो विश्व ब्रम्हांड है इसकी सेवा करने से ही परम पुरुष की सेवा हो गई* क्योंकि उससे  परम पुरुष खुश होते हैं तो भक्तों की पहुंच परमपुरुष तक है वह सेवा करेंगे तो नजदीक पहुंच ही जाएंगे यह सेवा करेंगे और चुपके चुपके पूछ लेंगे क्यों तुमने इस ब्रह्मांड की सृष्टि की ज्ञानी पूछ नहीं सकते नजदीक जानने का मौका नहीं है दोस्ती करने का मौका नहीं है परम पुरुष भक्त परम पुरुष भी अपने मन में विश्व ब्रम्हांड को बनाए हैं आनंद पाने के लिए भक्तों को यह बात याद रखनी चाहिए कि परम पुरुष हमको बनाए हैं दुनिया में भेजे हैं आनंद पाने के लिए मैं भी थोड़ा सा काम करता हूं ताकि उन्हें अधिक से अधिक आनंद मिलता रहे एक बात और ध्यान में मन में रखनी चाहिए कि हम परम पुरुष के मन के भीतर हो पैदाइश हुई मन के भीतर हो भी उनके मन के भीतर और आखिर तक मिलोगे भी उनमें अंत काल में मनुष्य परमात्मा में लीन हो जाते हैं इसलिए मनुष्य के लिए डरने की बात किसी भी हालत में नहीं है जब मौत हो जाएगी तब भी डर नेकी कोई बात नहीं क्योंकि वह तो परमात्मा में परम पुरुष में लीन हो जाएंगे वह तो कहीं नहीं जा रहे हैं इसलिए मौत से डरने की घबराने की कोई वजह नहीं है और पैदाइशी परम पुरुष से हुई है परम पुरुष पीता है परम पुरुष रिश्ता है इसलिए कोई भी मनुष्य छोटे नहीं है कोई भी मनुष्य छोटी जात के नहीं है कोई भी मनुष्य ऊंची जात के भी नहीं है सब के पिता एक हैं सब समान है कोई छोटे नहीं कोई बड़े नहीं दुनिया का हर मनुष्य बीआईपी है क्यों परम पुरुष उनके पिता है इसलिए कोई छोटा नहीं हो सकता सब समान स्कूल के हैं क्योंकि एक ही पिता है जो जात पात मानते हैं वह परम पुरुष को नहीं मानते हैं कोई एक पिता के बेटे 500 जाति के नहीं हो सकते जो परम पुरुष को मानते हैं वह जात-पात के भेदभाव को नहीं मानेंगे तो उत्पत्ति उन्हीं से और देखेंगे की स्थिति भी उन्हीं में उनके मन के भीतर ही हम किसी भी हालत में अलग नहीं हो सकते या जो विश्वभर में या जो समग्र सृष्टि है इसके साथ प्रोत योग के द्वारा परम पुरुष संयुक्त हैं अर्थात हमेशा समग्र विश्व को देख रहे हैं कोई भी लुक छिप कर कुछ कर नहीं सकता ठीक वैसे ही  हर जियो के साथ हर इंसान के साथ राम क्या कर रहा है श्याम क्या कर रहा है तू क्या कर रहा है देख रहे हैं सिर्फ देखना ही नहीं कि सब कुछ उनके मन के भीतर हो रहा है देखने के लिए कोई अलग प्रयास की जरूरत नहीं होती उनके भीतर सब कुछ है मन की आंखों से तुम लोग सब कुछ देख सकते हो परम पुरुष के बाहर कुछ नहीं है इसलिए कुछ कर सकते हो ना कुछ सोच सकते हो इसी से एक बहुत बड़ी असुविधा भी है और एक बहुत बड़ी सुविधा भी असुविधा क्या है तुम कुछ सोच रहे हो एकादशी के दिन अगर  कोई चॉकलेट खा ली है तो उनको मालूम हो ही जाएगा क्योंकि उनके मन के भीतर यह सब हो रहा है और एक बहुत बड़ी सुविधा क्या है कि किसी भी हालत में तुम अकेले नहीं हो हमेशा परम पुरुष तुम्हारे साथ हैं तुम्हारे माफिक शक्तिशाली दुनिया में और कोई और कौन है तो किसी भी हालत में हमें घबराना नहीं है और हमेशा यह बात याद रखना है कि परम पुरुष हमारे साथ हैं याद रखते हुए भी हम जो कुछ भी दुनियावी काम करेंगे हमारी जय होगी