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Jan,19,2021 02:21:25

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के उपाध्यक्ष ली यांग रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार, ढाई साल की जेल
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सिओल. भ्रष्टाचार के मामले में दक्षिण कोरिया की राजधानी सिओल स्थित एक कोर्ट ने सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक को. के वाइस चेयरमैन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. सोमवार को कोर्ट ने रिश्वत देने के मामले में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक को. के वाइस चेयरमैन ली जे यॉन्ग को दोषी करार देते हुए ढाई साल जेल की सजा सुनाई है.

इस मामले में ली जे के अलावा उनके लंबे समय से दोस्त रहे चोई सून सिल और सैमसंग के पूर्व अध्यक्ष पार्क जियुन हे को भी दोषी करार देते हुए जेल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने तीनों को तत्काल प्रभाव से तीनों को जेल भेजने का आदेश दिया है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि चोई ने सरकार के सहयोग और कंपनी के सत्ता हस्तांतरण के लिए इस अपराध में उनका साथ दिया है. बता दें कि रिश्वत का मामला सामने आने के बाद आरोपों में घिरे पार्क जियुन को एक महाभियोग के तहत पद से हटा दिया गया था.

फैसले के तुरंत बाद ली गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सियोल हाईकोर्ट में जब फैसला सुनाया जा रहा था, तब 52 वर्षीय ली वहीं मौजूद थे. फैसले के तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. रिश्वत देने के मामले में ली यांग तीन सालों से जेल से बाहर थे, क्योंकि उनकी सजा पर रोक लगा दी गई थी. फरवरी 2017 में ली के खिलाफ आरोप दायर किया गया था, जिसमें 29.8 बि?लियन वॉन (27.4 मिलियन डॉलर) की रिश्वत देने का आरोप था. इस पर सुनवाई के बाद ली को पांच साल जेल की सजा सुनाई गई. इस पर उन्होंने ऊपरी अदालत में अपील की और फिर कोर्ट ने उनकी ढाई साल की सजा पर रोक लगा दी.

अब ली की गिरफ्तारी के बाद वे कंपनी की आगामी बैठकों में न तो हिस्सा ले पाएंगे और न ही कंपनी के किसी फैसले में उनकी राय को शामिल किया जाएगा. इतना ही नहीं, ली अब कंपनी के उत्तराधिकार की प्रक्रिया को भी नहीं देख सकेंगे. मालूम हो कि पिछले साल अक्टूबर में सैमसंग के अध्यक्ष और ली के पिता ली कुन-ही का निधन हो गया था.

गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया के कानून के मुताबिक तीन या उससे कम की सजा को कुछ समय के लिए लंबित किया जा सकता है, लेकिन उन्हें फिर भी जेल जाना ही होता है. रिश्वत देने के मामले में ली पहले ही करीब एक साल जेल की सजा काट चुके हैं.

अब कानून के जानकारों का मानना है कि ली के पास कोई विकल्प नहीं है. इससे पहले रिश्वत लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हे को मिली 20 वर्ष की सजा को बरकरार रखा है.

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