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साध्वी प्रज्ञा के आंसू
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साध्वी प्रज्ञा के आंसू
जय प्रकाश राय
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के भाजपा ने भोपाल से कांगे्रस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ मैदान में उतारकर एक बड़ा दाव खेला है.प्रथम दृष्टया उसका यह दाव सटीक बैठा प्रतीत होता है। प्रज्ञा के मैदान में आते ही एक बार फिर हिंदू आतंकवाद को लेकर भाजपा कांगे्रस पर हमलावर हो गई है। नौ साल तक ेजेल में मिली यातनाओं का जिक्र कर साध्वी प्रज्ञा सिंह मीडिया के सामने अपने आंसू रोक नहीं पाई। अब उनके पोस्टर बनाकर अब होगा न्याय के नारे लिखे जा रहे हैं। कांगे्रस के अब मिलेगा न्याय के नारे का कुछ इस तरह काट निकाला गया है। ङ्क्षहदू आतंकवाद एक ऐसा मुद्दा है जो कांगे्रस को हमेशा ही बैकफुट पर धकेलता रहा है। कांगे्रस को इसपर सफाई देते नहीं बना है। अब भोपाल की इस लड़ाई को भाजपा पूरे देश में ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। इस मुद्दे पर उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, ओवैसी, आजम खान जैसे नेता जितनी टिप्पणी करेंगे भाजपा उसका उतना ही फायदा उठाने की कोशिश करेगी। यही कारण है कि अब इस मुद्दे का चुनावी नफा नुकसान बहुत मायने रखेगा।
कांगे्रस नेता इन्हीं बातों को लेकर साल 2014 में मिली पार्टी की शर्मनाक हार पर अपनी टिप्पणी में कहा था कि मतदाताओं में ऐसी धारणा बन गई कि कांगे्रस हिंदू विरोधी है। अब साध्वी प्रज्ञा पर जितनी टिप्पणी की जाएगी उसे हिंदू एवं महिला अस्मिता से जोड़कर दिखाने का भरपूर प्रयास होगा। वैसे ही 2019 के चुनाव मुद्दे की तलाश में अभी तक भटकता रहा है। भाजपा और न ही विपक्ष इस चुनाव में कोई मुद्दा बना पाये हैं। 2014 जैसी मोदी लहर इस बार नजर नहीं आई ऐसे में साध्वी प्रज्ञा के चुनावी मैदान में कूदते ही एक बड़ी हलचल पूरे देश में मच गई है। अब हालत ऐसी हो गई है कि विपक्ष उनपर जितना हमला बोलेगा उसे भाजपा सहानुभूति में परिणत करने के प्रयास करेगी, यदि कुछ नहीं कहा जाता तो भाजपा कहेगी कि उनके पास साध्वी के खिलाफ कुछ बोलने को नहीं है। साध्वी प्रज्ञा के चुनाव पर रोक लगाने की भी मांग उठ रही है। तो भाजपा का कहना है कि जब राहुल सोनिया बेल पर रहकर चुनाव लड़ सकते हैं तो साध्वी क्यों नहीं? यदि साध्वी प्रज्ञा के चुनाव पर किसी कारण से रोक लगने की नौबत आती है तो उसका भी चुनावी फायदा उठाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा के लिए यह एक ऐसा मुद्दा हाथ लगा है जिसके सहारे वह अपने वोटों को साधने एवं विपक्ष पर हमला बोलने का कोई अवसर नहीं चूकेगी।
लेखक हिंदी दैनिक चमकता आईना के संपादक हैं