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रोग भगाये योग
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रोग भगाये योग

जय प्रकाश राय
21 जून को पूरे विश्व में योग दिवस का मनाया जाना भारतीय परंपराओं को बहुत बड़ा महत्व दिया जाना है। स्वस्थ रहने के लिये हम न जाने कितने ही यतन करते है। इनमें योग का स्थान सर्वोपरि है। इसके लाभ अब साबित करने की जरूरत इस लिये भी नहीं है क्योंकि पूरी दुनियां इसके फायदे समझने लगा है तभी तो वहां योग वन डे इवेंट नहीं बल्कि नियमित जीवनशैली का अहम् हिस्सा बन गया है। जीवन की आपाधापी में हम खुद के लिये समय नहीं निकाल पाते। हम खुद स्वस्थ नहीं रहेंगे, मानसिक रूप से मजबूत नहीं बनेंगे तो फिर कोई भी काम सही तरीके से नहीं कर पायेंगे। योग की यही ताकत है कि इसके करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहता है।
सबसे बड़ी बात है कि इसके करने से कोई नुक्सान नहीं। न आर्थिक रूप से न मानसिक रूप से और न ही शारीरिक रूप से। बस इसे लेकर नियमित होने की जरूरत है। सुबह के समय वैसे भी लोग अपने काम को लेकर इतने सक्रिय नहीं रहते। विशेषज्ञ कहते है कि 30 मिनट से लेकर 45 मिनट भी नियमित योग के अनगिनत फायदे है। जो असाध्य रोग किसी अस्पताल में ठीक नहीं हो पाते, उनका इलाज इस योग ने ढूंढ निकाला है। बल्कि पहले से ही है। योग एक समय लुप्त हो गया था लेकिन विदेशों में योगा बनने और प्रभाव छोडऩे के बाद यह वापस हमारे यहां आया है और इसकी लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है।
एक अच्छी बात यह भी है कि भले भारत में योग के साम्प्रदायिक रंग चढ़ाने की कोशिश होती हो लेकिन कई देशों खासकर इस्लामिक देशो में इसका प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। वहां इसे लोग धर्म से जोड़कर नहीं देखते शरीर के फायदे के लिये करते है। योग पर साम्प्रदायिकता का रंग कुछ कुत्सित विचार को लेकर चढ़ाने की कोशिश की जाती है लेकिन अब तो यह जिस तरीके से लोकप्रिय होता जा रहा है उसका असर भी दिखने लगा है। कई लोगों के अनुभव योग के महत्व को और बढ़ाने में सहायक हो रहे है। इसे किसी सरकार या धर्म से जोड़कर देखने के बजाय खुद से जोड़कर जो देखेगा वही इसका लाभ उठा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रांची में आयोजित योग के मुख्य कार्यक्रम में कहा कि उत्तम स्वास्थ्य के लिए चार पकार आवश्यक हैं. ये चार पकार हैं पानी, पोषण, पर्यावरण और परिश्रम. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये चार चीजें- पीने का शुद्ध पानी मिले, आवश्यकता के अनुसार पोषण प्राप्त हो, स्वच्छ पर्यावरण हो और परिश्रम जीवन का हिस्सा हो, तो स्वयं उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. अर्थात् जीवन में चार पकार हों, तो उत्तम स्वास्थ्य होना तय है। यह कोई धर्म या जाति को नहीं देखता।

लेखक चमकता आईना के संपादक हैं