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डायन नहीं होता समाज बनाता है को लेकर आजिविका महिला ग्राम संगठन चालाया जागरूकता अभियान और की नुक्कड़ नाटक
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संतोष वर्मा

चाईबासा। एक ओर जहां लोग डीजीटल युग की ओर जा रहें है वहीं आज भी कोलहान प्रमंडल पश्चिमी सिंहभूम जिले में डायन विशायन के नाम पर अंधविश्वास में लोग अपने ही गांव में अपने ही लोगों की जान लेने में पड़े है.इस पर नकेल कसने के लिए जहां पुलिस प्रबंधन व जिला प्रशासन तैयारी की है वहीं अब डायन कुप्रथा मुक्त झारखंड बनाने के लिए अभियान शुरू कर दी गई है.इसी अभियान को लेकर जिले के नोवामुण्डी प्रखंड के बडाजामदा थाना क्षेत्र के बडाजामदा पंचायत में आजिविका महिला ग्राम संगठन द्वारा क्षेत्र में डायन कुप्रथा मुक्त बनाने के लिए ग्रामीणों के बिच जहां प्रचार प्रसार अभियान चलाया गया वहीं संगठन के अध्यक्षा सोनी देवी के नेतृत्व में दिदियों के सहयोग से एक नुकड़ नाटक का भी आयोजन कर ग्रामीणों के बीच डायन कुप्रथा और अंधविश्वाष में रह रहे लोगों के बीच जागरुकता अभियान चलाई गई.ताकी अंधविश्वाष में किसी महिला या पुरूष की हत्या डायन विसायन के नाम पर ना हो.आज इन क्षेत्रों में ज्यादातर विवाद जमीन से सबंधित होता है और बाद में डायन के नाम पर हत्या कर दी जाती तो दुसरे ओर लोग गांव घर में विमार होते है तो डॉक्टर के पास जाने के बजाय ओझा गुणी के चक्कर में फंस जाते है और परिणाम होता है की गांव के ही लोग डायन विशायन के संदेह पर लोगों की हत्या कर दी जाती है.इस नुकड़ नाटक में जेएसएलपीएस की ओर से संचालित आजिविका महिला ग्राम संगठन के दिदियों में सुनीता सुरीन, लक्षमी मिंज, जोहरा वेगम, कौश्लया गुप्ता, सावित्रि देवी, कूडी चातोम्बा, विनिता देवी, दोशमा निशिया लईवी गोप सहित काफी संख्या में ग्रामीण महिला और जिप सदस्य शंभु हाजरा शामील थे.

डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम को कड़ाई से लागू करें।पुलिस अधीक्षक

चाईबासा जिला अंतर्गत सभी थाना प्रभारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम को कड़ाई से लागू करें। किसी भी व्यक्ति या किसी भी महिला के साथ यदि डायन के नाम पर कोई हिंसा होती है तो इसका प्रतिकार किया जाए। उस हिंसा को तुरंत डॉक्युमेंटेड करके तुरंत कार्रवाई की जाए ताकि यह एक बड़ी घटना में तब्दील ना हो। चूंकि छोटी-छोटी घटनाएं ही होती हैं जिसमे स्थानीय चौकीदार या स्थानीय जनप्रतिनिधियों का यदि सहयोग लिया जाए या फिर स्थानीय मानकी मुंडा का सहयोग लिया जाए तो इस तरह की आसूचना समय रहते प्राप्त की जा सकती है।हम लोगों का बल यह होगा कि सामान्य विवाद के कारण जो आसूचनाएं होती हैं वे सूचना पुलिस तक समय रहते पहुंचें ताकि उस पर कार्रवाई कर सके और प्रतिरोधात्मक कार्रवाई करते हुए हत्या जैसी किसी घटना को रोका जा सकता है।
पुलिस लगातार इस पर जागरूकता अभियान भी चलाएगी। डालसा के तहत भी जागरूकता शिविर चलाया जाता है। वैसे गांवों को चिन्हित करके डालसा के सचिव से भी अनुरोध करेंगे कि उन गांवों में जहां इस तरह की घटनाएं हुई हैं वहां पर जागरूकता अभियान चलाया जाए।