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गांव-गरीब, किसान और महिलाओं के नाम रहा बजट
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गांव-गरीब, किसान और महिलाओं के नाम रहा बजट
देवानंद सिंह
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट संसद में पेश किया। निर्मला सीतारमण ने करीब 2 घंटे 15 मिनट का भाषण दिया। बजट पेश करने से पहले उन्होंने एक परंपरा से अलग हटते हुए बजट दस्तावेज को ब्रीफकेस में न लेकर एक लाल रंग के कपड़े में रखा और उसके ऊपर अशोक चिन्ह लगा था। इस अलग परंपरा की शुरूआत करने से बजट के भी कुछ अलग होने की उम्मीद थी, लेकिन कोई ख्ोमा अधिक लाभांवित हुआ तो किसी ख्ोमे को बहुत अधिक कुछ नहीं मिला। गांव-गरीब और महिलाओं पर निश्चित ही बजट का फोकस रहा, लेकिन नौकरी पेशा वर्ग जिस तरह की उम्मीद लगाए बैठा था, वैसा कुछ नहीं हुआ।
देश की पहली पूर्ण कालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में अपना प्रथम बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार का मकसद हमारे नागरिकों के जीवन को अधिक सरल बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्बारा स्वच्छता अभियान पर दिए जाने वाले जोर की प्रतिध्वनि वित्त मंत्री के बजट भाषण में भी सुनाई दी। उन्होंने कहा, ”यह सूचना देते हुए प्रसन्न एवं संतुष्ट हूं कि भारत को दो अक्तूबर 2०19 को खुले में शौच करने से मुक्त घोषित किया जाएगा। वित्त मंत्री के पिटारे में मिडिल क्लास आस लगाए बैठा था, लेकिन वित्तमंत्री गांव-गरीब, किसान, महिला के नाम बजट कर गई। पीएम मोदी अपनी प्रतिक्रिया देने आए तो वह भी कहकर चले गए कि गरीब, देश के विकास का पावर हाउस बनेंगे। इस बजट से गरीबों को बल मिलेगा और युवाओं को बेहतर कल मिलेगा। सवाल यही था कि किसी को बल मिला, किसी को बेहतर कल मिला, लेकिन मध्यवर्ग, सैलरी क्लास को क्या मिला? पीएम मोदी ने कहा कि मध्यम वर्ग को इस बजट से प्रगति मिलेगी।
अंतरिम बजट में जिस तरीके से तत्कालीन वित्तमंत्री ने कहा था कि आने वाले समय में और भी कुछ मिलेगा, वैसा कुछ इस बजट में देखने को नहीं मिला। अंतरिम बजट में कहा गया था कि 5 लाख तक की आमदनी वालों को टैक्स से मुक्त रखा गया है। लोगों को उम्मीद थी कि यह घोषणा सभी के लिए लागू किए जाने की बात इस बजट में की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सैलरी वाले लोगों की सबसे ज्यादा इसी से उम्मीद थी। किसी तरीके की छूट जैसे 8०सी और 8०डी की सीमा बढ़ाई जाती, वह भी इस बजट में नहीं हुआ। एक तरह से सैलरी पेशा वालों को जो मिलना चाहिए था, वह भी नहीं मिला।
45 लाख तक के होम लोन पर पहले ब्याज में 2 लाख रुपए तक की छूट दी जा रही थी, जिसे बढ़ाकर अब 3.5 लाख रुपए कर दिया गया है। वैसे इसकी उम्मीद किसी को भी नहीं थी। वहीं, इलेक्ट्रिक गाडिèयों पर छूट दिए जाने की बात की गई है, यह भी उम्मीद नहीं थी, हालांकि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को प्रोत्साहित करना चाहती है, लेकिन वह इस तरीके से प्रोत्साहित करेगी इसकी उम्मीद नहीं की जा रही थी।
पीएम मोदी ने भले ही इस बात का जिक्र किया कि मध्यम वर्ग को प्रगति मिलेगी, लेकिन जो ठोस रूप में शायद नहीं दिख रहा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पहले से ही नियंत्रण नहीं है। कहा जा रहा था कि उसे भी जीएसटी में लाया जाए, ताकि पट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर कुछ लगाम लगे, लेकिन इस बजट में हुआ कुछ अलग ही। सरकार ने पेट्रोल-डीजल को दो-दो रुपए महंगा कर दिया। इसी तरीके से सोने पर 2.5 फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगाकर इसे और महंगा कर दिया।
देश के लोगों ने केंद्र में एक मजबूत सरकार बनाई है। इस बार सरकार बनाने में महिलाओं की काफी अहम भूमिका रही। सबसे ज्यादा महिला सांसद इसी बार चुनकर आई हैं। सबसे ज्यादा महिला मतदाताओं ने इसी चुनाव में अपने मताधिकार का उपयोग किया। उम्मीद की जा रही थी कि सरकार कुछ राहत देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश को चलाने में देश के करदाताओं काफी अहम भूमिका होती है, इसीलिए वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में देश के करदाताओं का शुक्रिया अदा किया।